जगदलपुर/बस्तर न्यूज
शहर के लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण आज पूरी तरह भक्ति रस में सराबोर रहा। श्रद्धालु पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भगवान के नाम का स्मरण करते हुए संकीर्तन में सहभागी बने। यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात प्रारंभ हुए 24 घंटे के अखंड हरि नाम महामंत्र जाप का समापन हुआ। इस दौरान आसपास के लगभग 20 गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने संकीर्तन में भाग लेकर भगवान के नाम का गुणगान किया। हरि भक्ति में लीन श्रद्धालु महामंत्रों का जाप करते हुए नृत्य और भजन-कीर्तन में मग्न दिखाई दिए। आयोजन स्थल पर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिभाव का अद्भुत संगम देखने को मिला।
हरि नाम संकीर्तन में उमड़ा आस्था का सागर
पूर्णाहुति के बाद प्रारंभ हुए 24 घंटे के अखंड हरिनाम संकीर्तन में श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिली। गांव-गांव से पहुंचे महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग श्रद्धालु “हरे राम-हरे कृष्ण” महामंत्र के जाप में लीन रहे। संकीर्तन के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भजन-कीर्तन के साथ भगवान के नाम में झूमते रहे। यह दृश्य धार्मिक आस्था और सामूहिक भक्ति का अद्वितीय उदाहरण बन गया।
भूतेश्वर महादेव सेवा समिति द्वारा गांव-गांव से पहुंचे श्रद्धालुओं तथा आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले कर्मठ कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया। समिति की ओर से प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनकी सेवाओं का अभिनंदन किया गया। यह सम्मान श्रद्धा, सेवा और समर्पण की भावना को प्रोत्साहित करने वाला रहा। आचार्य पंडित रोमितराज त्रिपाठी ने बताया कि हरिहर महायज्ञ का उद्देश्य विश्व शांति, मानव कल्याण और धर्म जागरण का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। सात दिवसीय धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर यज्ञ, पूजन, संकीर्तन और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का लाभ प्राप्त किया।
समापन अवसर पर आयोजित विशाल महाभंडारे में शहर सहित ओड़िशा और आसपास के दर्जनों गांवों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। विशेष रूप से केले के पत्तों पर परोसे गए अन्नभोग को श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ ग्रहण किया। पंगत में एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा ने सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे का संदेश भी दिया।



