जगदलपुर। बस्तर अंचल की समृद्ध जैव-विविधता और पारंपरिक कृषि संपदा को वैश्विक मंच देने के लिए क्रांतिकारी डेबरीधुर उद्यानिकी महाविद्यालय परिसर में दो दिवसीय भव्य ‘बस्तर आम महोत्सव’ का शुभारंभ हुआ। महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (दुर्ग) और उद्यानिकी संचालनालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता बस्तर सहित छत्तीसगढ़ के अन्य क्षेत्रों से जुटे 1500 से अधिक किसानों की उपस्थिति रही, जो अपने साथ 200 से अधिक विविध आम की प्रजातियों का विशाल संसार लेकर पहुंचे थे। इस भव्य प्रदर्शनी में किसानों की सक्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के कोने-कोने से आए अन्नदाता अपने साथ पारंपरिक, उन्नत और हाइब्रिड आमों की ढेरों किस्में लेकर आए थे, जिससे पूरा परिसर आम की खुशबू और अनूठी रंगत से सराबोर हो उठा। इस महोत्सव में प्रदर्शित की गईं आम की इन विविध प्रजातियों में विलुप्त हो रही पारंपरिक किस्मों के संरक्षण को प्रमुखता से रेखांकित किया गया, जिसने वैज्ञानिकों और आम प्रेमियों को अचंभित कर दिया।
मुख्य अतिथि बस्तर सांसद महेश कश्यप ने किसानों द्वारा लाई गईं इन हज़ारों प्रजातियों की ‘जीरो-केमिकल’ शुद्धता को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताते हुए इसे एक बड़ा वैश्विक प्रीमियम ब्रांड बनाने का विज़न साझा किया। वही क्षेत्रीय विधायक किरण सिंह देव ने प्रदर्शनी में सजे आमों के इस महा संसार और उद्यानिकी के छात्रों द्वारा आम से तैयार किए गए ’56 भोग’ की जमकर सराहना की
इस महोत्सव के दौरान तकनीकी और वैश्विक परिदृश्य को सामने रखते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवि आर. सक्सेना ने वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के हवाले से वर्ष 2050 तक 1000 करोड़ की आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा, जमीन की घटती उपजाऊ क्षमता और भोजन की बर्बादी जैसे वैश्विक खतरों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने एल नीनो के प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ के किसानों से अपनी कम से कम 25% भूमि पर अनिवार्य रूप से जैविक खेती अपनाने की पुरजोर अपील की।



