जगदलपुर/बस्तर न्यूज
कांग्रेसी नेता एवं संभागीय अध्यक्ष ओबीसी समाज शंकर सेन ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ओबीसी समाज को जानबूझकर नजरअंदाज करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। जातिगत जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम/कालम कोड नहीं देना केंद्र सरकार की ओबीसी विरोधी चेहरा उजागर होता प्रतीत हो रहा है।
केंद्र सरकार ने 2026-27 की आगामी जनगणना में जातिगत गणना शामिल करने का ऐलान तो कर दिया, लेकिन ओबीसी समाज के साथ फिर से अन्याय किया जा रहा है। जनगणना फॉर्म में एससी और एसटी के लिए अलग कॉलम तो रखा गया है, लेकिन ओबीसी वर्ग के लिए कोई अलग कॉलम या स्पष्ट कालम कोड नहीं दिया गया है। यह ओबीसी समाज को जानबूझकर नजरअंदाज करने और उनके सही आंकड़ों को छिपाने की कोशिश है। ओबीसी समाज देश की आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा है। बिहार जैसे राज्यों के सर्वे में ओबीसी और ईबीसी मिलाकर 60% से अधिक आबादी सामने आई है। यदि केंद्र सरकार जातिगत जनगणना कर भी रही है, तो ओबीसी के लिए अलग से कॉलम और स्पष्ट कोड दिए बिना यह गणना अधूरी और पक्षपाती होगी। इससे ओबीसी वर्ग को उनके वास्तविक अनुपात में आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और विकास योजनाओं में न्याय नहीं मिल पाएगा। शंकर सेन ने आगे कहा हमारी सरकार से स्पष्ट मांग करते हैं कि जातिगत जनगणना फॉर्म में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम तुरंत जोड़ा जाए ओबीसी की सभी उप-जातियों के लिए स्पष्ट कालम कोड सुनिश्चित किया जाए, ताकि सटीक गणना हो सके। केंद्र और राज्य ओबीसी सूचियों को मिलाकर एक व्यापक कोड डायरेक्टरी तैयार की जाए।50% आरक्षण की सीमा हटाकर ओबीसी समाज को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण दिया जाए।जनगणना की प्रक्रिया में कोई राजनीतिक हस्तक्षेप न हो और ओबीसी समुदाय को पूर्ण न्याय मिले। यह केंद्र सरकार का ओबीसी समाज के प्रति पूर्वाग्रह है। जब एससी, एसटी के लिए अलग कॉलम है, तो ओबीसी को अलग कॉलम क्यों नहीं? क्या ओबीसी समाज दूसरे दर्जे का नागरिक है? कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर पूरे देश में ओबीसी समाज के साथ खड़ी है और जरूरत पड़ी तो आंदोलन भी करेगी।
हमारी स्पष्ट मांग है कि केंद्र सरकार तुरंत जनगणना फॉर्म में संशोधन कर ओबीसी कॉलम और कोड शामिल करे, अन्यथा यह जनगणना ओबीसी समाज के प्रति अन्यायपूर्ण साबित होगी।




