दंतेवाड़ा/बस्तर न्यूज
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर के तत्वावधान में दंतेवाड़ा में आयोजित ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि दंतेवाड़ा सहित पूरे बस्तर को नशामुक्त और स्वच्छ बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत–संकल्प अभियान, राष्ट्रीय पोषण माह और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को स्वस्थ और विकसित समाज के निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय बताते हुए जन जागरूकता के साथ सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया।
सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छोटे-छोटे विषयों को जन आंदोलन का रूप देकर उन्हें जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। स्वच्छता अभियान इसका प्रमुख उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट के बढ़ते उपयोग से पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है। उन्होंने प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग को कम करने तथा स्थानीय और पर्यावरण-अनुकूल वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। आगे सांसद बस्तर ने कहा कि नशे की समस्या से सबसे अधिक प्रभावित युवा होते हैं और उन्हें नशे से बचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। चरस, गांजा और अन्य मादक पदार्थों का सेवन युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य को प्रभावित करता है। दंतेवाड़ा सहित पूरे बस्तर क्षेत्र को नशामुक्त बनाने के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, मीडिया, सामाजिक संगठनों और नागरिकों को मिलकर अभियान चलाना होगा।
विधायक चैतराम अटामी ने नशे से होने वाले नुकसान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका युवाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और पारिवारिक जीवन पर गंभीर असर पड़ता है। उन्होंने युवाओं से नशा छोड़ने और देश को मजबूत बनाने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
हमारी आंगनवाड़ी हमारी जिम्मेदारी के साथ पोषण माह की शुरुआत
‘पत्रकार वार्तालाप’ कार्यक्रम में जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक रविकान्त ध्रुव ने 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 की पांच प्रमुख प्राथमिकताओं आहार विविधता एवं पर्याप्त प्रोटीन, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा गरम पका भोजन, सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही, बाल विकास के लिए पोषण एवं प्रारंभिक उत्तेजना तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य के लिए नकद हस्तांतरण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पोषण माह की थीम ‘हमारी आंगनवाड़ी हमारी जिम्मेदारी’ है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, देखभाल और प्रारंभिक बाल विकास के लिए सामुदायिक भागीदारी के केंद्र के रूप में मजबूत करना तथा पोषण के प्रति सामूहिक स्वामित्व और जवाबदेही बढ़ाना है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से पात्र गर्भवती और धात्री महिलाओं तक मातृत्व लाभ पहुंचाने, मातृ पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पात्र महिलाओं का पंजीकरण सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कचरा प्रबंधन में बड़ा बदलाव, चार स्तर पर पृथक्करण अनिवार्य
मुख्य नगर पालिका अधिकारी अरुण ध्रुव ने पत्रकारों को नए नियमों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अब कचरे को स्रोत पर चार श्रेणियों गीला, सूखा, स्वच्छता और विशेष देखभाल अपशिष्ट में अलग करना होगा। गीले कचरे में रसोई, भोजन और बागवानी का कचरा, जबकि सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज, कांच, धातु और कपड़ा शामिल होंगे। डायपर और सैनिटरी पैड जैसे स्वच्छता अपशिष्ट तथा ई-कचरा, बैटरियां, दवाइयां, ट्यूबलाइट और पेंट की बोतलों जैसे विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग रखना होगा। नियमों के तहत कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से कचरे के संग्रहण और परिवहन से लेकर सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधा में छंटाई तथा पुराने जमा कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की निगरानी की जा सकेगी। नए नियमों का मूल संदेश स्पष्ट है, कचरा प्रबंधन केवल स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि कचरा उत्पन्न करने वाले प्रत्येक व्यक्ति, संस्थान और प्रतिष्ठान की साझा जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, उपाध्यक्ष अरविंद कुंजाम तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी उपस्थित थे।
