जगदलपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद् की बैठक में खरीफ-2026 से कृषक उन्नति योजना के नवीन स्वरूप को मंजूरी दिए जाने पर जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक बस्तर के अध्यक्ष दिनेश कश्यप एवं उपाध्यक्ष श्रीनिवास मिश्रा ने राज्य सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे किसानों के भविष्य को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया है।
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक बस्तर के अध्यक्ष दिनेश कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास जैसी वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने हेतु प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता प्रदान करने का निर्णय किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगा। इससे किसानों को खेती में नए विकल्प मिलेंगे तथा उनकी आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल आर्थिक मजबूती ही नहीं बल्कि जल संरक्षण और कृषि क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा। एकीकृत किसान पोर्टल, एग्रीस्टेक पंजीयन एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में फसल विविधीकरण को नई गति मिलेगी और किसान आधुनिक एवं लाभकारी खेती की ओर प्रेरित होंगे।
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक बस्तर के उपाध्यक्ष श्रीनिवास मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार किसानों के हित और उनकी उन्नति के लिए संवेदनशील निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय किसानों, स्वास्थ्य और पर्यावरण तीनों दृष्टि से अत्यंत सराहनीय है। धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं मिलेट्स जैसी फसलों को बढ़ावा मिलने से रासायनिक खाद की खपत में कमी आएगी तथा खाद की कमी जैसी समस्याओं से भी किसानों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज देशभर में चिकित्सक एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी कोदो, कुटकी, रागी जैसे मिलेट्स के उपयोग को प्रोत्साहित कर रहे हैं, क्योंकि ये स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं और लोगों के दवाईयों पर होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करने में भी सहायक सिद्ध हो रहे हैं। यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्वस्थ समाज निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। बस्तर के इन दोनों पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ के किसानों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।




