जगदलपुर

प्राकृतिक संसाधनों के साथ समृद्ध आदिवासी कला, संस्कृति को सहजने की जरूरत : राज्यपाल

जगदलपुर। शहीद महेंद्र कर्मा विश्व विद्यालय में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” के अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि बस्तर की पवित्र भूमि में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य को लेकर विश्वास जताया, बस्तर में नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत शुरुआत है। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विश्व के सबसे युवा देशों में शामिल है, ऐसे में युवाओं को नौकरी खोजने के बजाय नौकरी देने वाला बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इसके लिए उद्यमिता, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को अपनाना जरूरी है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में वनों की सुरक्षा, नैसर्गिक नदी-नाले का संरक्षण करने सहित उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग कर समावेशी विकास की अवधारणा को अपनाने की जरूरत बताई। नई शिक्षा नीति 2020 का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं, बल्कि कौशल, नवाचार और आत्मनिर्भरता पर आधारित है। उन्होंने “सीखो, लागू करो, नया सोचो, कमाओ” के सूत्र को अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में राज्यपाल ने इनोवेशन एण्ड स्टार्टअप कंपेडियम पुस्तक का विमोचन किया। साथ ही उन्होंने पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती को भी सम्मानित किया।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर की हुनर और क्षमता को बाहर की दुनिया में लाना है। बस्तर की संस्कृति-कला को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। बस्तर के शिल्प, कला, खानपान की संस्कृति को, वनधन को संवर्धन और संरक्षण के साथ व्यापक रूप से रोजगार और स्व रोजगार से जोड़ने की पहल करते हुए बढ़ावा देने जरूरत है। उन्होंने कहा कि इनोवेशन के माध्यम हम रोजगार देने वाले की भूमिका निभाएं।

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