दंतेवाड़ा। कभी रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास की किरण जगी है। सुकमा जिले के ग्राम भीमापुरम निवासी मड़कम सुक्की के लिए कृत्रिम पैर मिलना केवल एक सहायक उपकरण प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन को फिर से सहज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मड़कम सुक्की के जीवन में 26 मई 2024 का दिन एक दुखद घटना लेकर आया, जब जंगल में टोरा बीनने के बाद नदी किनारे बिछाए गए आईईडी की चपेट में आने से उनका बायां पैर क्षतिग्रस्त हो गया। इस घटना ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। पैर नहीं होने के कारण उन्हें चलने-फिरने और रोजमर्रा के अनेक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सामान्य काम भी चुनौतीपूर्ण हो गए थे। ऐसे कठिन समय में दिव्यांग सहायता शिविर उनके जीवन में नई आशा लेकर आया। शिविर के माध्यम से उन्हें कृत्रिम पैर उपलब्ध कराया गया, जिससे अब उनके जीवन में आत्मनिर्भरता की नई राह खुलने की उम्मीद है।
मड़कम सुक्की ने भावुक होकर कहा कि “पैर नहीं होने से मुझे बहुत सी चीजों में परेशानी होती थी, लेकिन अब पैर लग जाने से मेरे लिए हर चीज आसान हो जाएगी।”
उनकी यह खुशी बताती है कि समय पर मिली सहायता किसी व्यक्ति के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकती है। कृत्रिम पैर मिलने से सुक्की को न केवल दैनिक कार्यों में सहूलियत मिलने की उम्मीद है, बल्कि वे पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का सपना भी देख रही हैं। यह सहायता उनके जीवन में नई उम्मीद, सम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सार्थक पहल है।
