जगदलपुर। सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन में सहकारिता तंत्र को आधुनिक, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए देश भर के वरिष्ठ अधिकारियों का महामंथन हुआ। सहकार से समृद्धि के संकल्प के साथ आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का मुख्य केंद्र बीते छह महीनों की प्रगति सहित हासिल उपलब्धियों की समीक्षा और आने वाले समय की रणनीतियों को ठोस रूप देना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ सहकारिता से जुड़ी प्रगति गतिविधियों, पीपीटी और वीडियो प्रदर्शन के साथ हुआ। इसके उपरांत भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष भूटानी ने अपने मुख्य संबोधन में सहकारिता आंदोलन को ग्रामीण आर्थिकी की धुरी बताते हुए इसे जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने का आह्वान किया।

सम्मेलन के तकनीकी और नीतिगत सत्रों में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के सुदृढ़ीकरण और विस्तार को लेकर डिप्टी डायरेक्टर नवीन कुमार ने एमपैक्स के गठन की रूपरेखा सामने रखी, जबकि डायरेक्टर पंकज श्रीवास्तव ने पैक्स के डिजिटलीकरण व कंप्यूटरीकरण से प्रणाली में आने वाली पारदर्शिता को रेखांकित किया। देश में खाद्यान्न सुरक्षा और भंडारण ढांचे को मजबूती देने के उद्देश्य से डायरेक्टर उल्मना सारंगी ने वल्र्डस लार्जेस्ट ग्रेन स्टोरेज प्रोजेक्ट की प्रगति साझा की। इसी क्रम में सहकारिता के दायरे को बढ़ाने के लिए डिप्टी डायरेक्टर सुनील कुमार स्वर्णकार ने बिजनेस डाइवर्सिफिकेशन तथा डायरेक्टर कुमार रामकृष्ण ने को-ऑपरेटिव बैंकिंग को नई तकनीकों से लैस करने पर अपनी बात रखी। इसके अतिरिक्त श्रीमती रेनु शेखावत ने नेशनल कोऑपरेटिव डेटाबेस के प्रबंधन और महत्व पर प्रकाश डाला तथा डॉ. मुकेश कुमार ने टीएसयू व नई राष्ट्रीय सहकारी नीति के आगामी रोडमैप को प्रस्तुत किया।
सम्मेलन के उत्तरार्ध में राज्यों की सीधी सहभागिता और उनके व्यावहारिक अनुभवों की समीक्षा की गई। पूर्वोत्तर एवं पूर्वी राज्यों के विशेष सत्र की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना ने की तथा संचालन पंजीयक सहकारी समितियां मिजोरम द्वारा किया गया, जिसमें असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, सिक्किम, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्यों की पहलों की समीक्षा हुई और प्रेरक वीडियो के जरिए सफलता की कहानियां दिखाई गईं। वहीं पश्चिमी एवं दक्षिणी राज्यों के सत्र का नेतृत्व एसीएस तमिलनाडु और संचालन पंजीयक सहकारी समितियां महाराष्ट्र ने किया, जिसमें राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, गोवा और महाराष्ट्र के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों के सहकारिता मॉडलों और प्रगति रिपोर्ट पर प्रभावी प्रस्तुतियां दीं।
