September 23, 2026

संघर्ष की छाया से शिक्षा की रोशनी तक, आस्था गुरुकुल गढ़ रहा बच्चों का भविष्य

दंतेवाड़ा/बस्तर न्यूज

एक ऐसा क्षेत्र जो दशकों की हिंसा और विघटन से गुज़रा है, वहां जवांगा का एजुकेशन सिटी में एक आवासीय स्कूल बच्चों को वयस्क बनने की राह पर एक अलग मार्ग प्रदान कर रहा है। शिक्षा, स्थिरता और एक ऐसे जीवन की संभावना के माध्यम से, जो उनके बचपन को आकार देने वाली परिस्थितियों से बहुत दूर है।

आस्था विद्या मंदिर, जिसे आस्था गुरुकुल के नाम से भी जाना जाता है, वर्तमान में कक्षा 1 से 12 तक के लगभग 1,300 छात्रों का घर है। दंतेवाड़ा जिले के गीदम विकासखंड, ग्राम जवांगा में एजुकेशन सिटी में स्थित यह आवासीय स्कूल उन समुदायों के
बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान बन गया है, जिन्होंने लंबे समय से चल रहे संघर्ष का खामियाजा भुगता है। अनुमान है कि इसके आधे से अधिक छात्र प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वामपंथी उग्रवाद से जुड़ी हिंसा से प्रभावित हुए हैं। यह स्कूल ऐसी हिंसा के कारण अनाथ हुए बच्चों, उन बच्चों को जिनके माता-पिता विद्रोह में शामिल थे और प्रभावित क्षेत्रों, विशेष रूप से दंतेवाड़ा और व्यापक बस्तर क्षेत्र के छात्रों को प्राथमिकता देता है। कुछ छात्रों पर संघर्ष का प्रभाव कक्षा में प्रवेश करने से पहले ही पड़ जाता है।

प्राचार्य रवींद्र पाणिग्राही ने कहा कि स्कूल विशेष प्राथमिकता मानदंडों के तहत बच्चों को दाखिला देते समय आधिकारिक दस्तावेज़ों पर निर्भर करता है। पुलिस-प्रमाण, जो यह पुष्टि करता है कि छात्र का इलाका एलडब्ल्यूई गतिविधि से प्रभावित हुआ है और किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु से संबंधित एफआईआर रिकॉर्ड उन दस्तावेजों में शामिल हैं, जिन पर विचार किया जाता है, यद्यपि इसका उद्देश्य आवास और स्कूली-शिक्षा तक पहुँच प्रदान करने से परे है। स्कूल ने एक ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास किया है, जहां हिंसा के बीच पले-बढ़े बच्चे उबर सकें, सीख सकें और उन परिस्थितियों से परे एक भविष्य की कल्पना कर सकें जो उन्हें विरासत में मिली हैं। जो बच्चे हिंसा से प्रभावित हुए हैं, उन्हें विशेषज्ञों द्वारा परामर्श दिया जाता है। वही आईएएस अधिकारियों जैसे कुशल व्यक्ति भी विशेष व्याख्यान देते हैं और छात्रों को प्रेरित करने के लिए उनसे बातचीत करते हैं।

एजुकेशन सिटी में स्कूल का परिचालन एनएमडीसी सीएसआर द्वारा वित्त-पोषित है और जिला प्रशासन, राज्य सरकार के पास है, अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके छात्रों को पढ़ाने के लिए कक्षाएँ स्मार्ट स्क्रीन सिस्टम से सुसज्जित है। आस्था गुरुकुल 2013 में शुरू किया गया था, जिसमें एनएमडीसी ने इसके बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सीएसआर सहायता प्रदान की थी । परिसर में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग आवासीय भवन और 1,000 से अधिक छात्रों की क्षमता वाला एक सभागार शामिल है। वित्तीय प्रतिबद्धता निर्माण के बाद भी जारी है । एनएमडीसी का सीएसआर वित्त-पोषण स्कूल संचालन में सहायता करता है, जिसमें वार्षिक परिचालन व्यय अकेले लगभग 3.5 करोड़ रुपये है। इस व्यवस्था ने एक पब्लिक-कारपोरेट मॉडल बनाया है, जिसमें स्कूल राज्य सरकार द्वारा संचालित संस्थान है, जबकि एनएमडीसी का सीएसआर वित्त-पोषण इसके बुनियादी ढांचे और निरंतर संचालन में सहायता करता है।

स्कूल सीबीएसई पाठ्यक्रम का अनुसरण करता है, जबकि शिक्षण में प्रौद्योगिकी को शामिल करने के लिए क्लासरूम स्मार्ट-स्क्रीन सिस्टम से सुसज्जित हैं। दूर-दराज के गांवों से आने वाले छात्रों के लिए जिनमें से कुछ ने लंबे समय तक संघर्ष का अनुभव किया है और जिनकी पहुँच सीमित शैक्षिक बुनियादी ढांचे तक थी, ये सुविधाएं उनके सीखने के माहौल में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करती हैं। एक बच्चे के लिए, जिसने हिंसा के कारण अपने माता-पिता को खो दिया है, संघर्ष में फँसे गाँव में पला-बढ़ा है अथवा उग्रवाद से प्रभावित परिवार में पैदा हुआ है, आवासीय विद्यालय का महत्व शिक्षा से कहीं अधिक है। परिसर एक संरचित वातावरण, औपचारिक स्कूली-शिक्षा, परामर्श और लोगों व अवसरों से परिचिति कराता है, जो अन्यथा बस्तर के दूर-दराज के बच्चों के लिए पहुँच से दूर होते हैं। अपनी शुरुआत के एक दशक से अधिक समय बाद आस्था गुरुकुल शिक्षा के माध्यम से संघर्ष के परिणामों को निपटने के एक व्यापक प्रयास का हिस्सा बन गया है। इसके क्लासरूम अब सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत अध्ययन करने वाले बच्चों से भरे हुए हैं, इसके आवासीय भवनों में पूरे क्षेत्र के छात्र रहते हैं और इसका परिसर दैनिक दिनचर्या प्रदान करता है, जो उनके कई परिवारों को प्रभावित करने वाली हिंसा से बहुत दूर है। दंतेवाड़ा में जहां संघर्ष के परिणामों को अक्सर जीवन-हानि और समुदायों के उजड़ने से मापा जाता है, स्कूल का दीर्घकालिक प्रभाव अंततः तब दिखता है जब इसके छात्र जावंगा छोड़ने के बाद कुछ करने में सक्षम होते हैं। और यह शिक्षा उन्हें ऐसा भविष्य चुनने की स्वतंत्रता देती है, जो यह परिभाषित नहीं करती है कि वे कहां से आए हैं, बल्कि इस बात से तय होता है कि वे कहाँ जाना चाहते हैं

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