September 19, 2026

वनांचल के छात्रों को घुड़सवारी विधा में पारंगत बना रहा है जिला प्रशासन

दंतेवाड़ा । बच्चों में छिपी प्रतिभा को उजागर करने के लिए छात्र जीवन एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, यही समय होता है जब बच्चों के रूचि अनुरूप उनके रूझान को पहचान कर उनके भावी जीवन की दशा और दिशा को सही मार्गदर्शन दें सकते है। यु तो छात्रों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के लिए किताबी ज्ञान के साथ-साथ खेल-कूद सहित अतिरिक्त विधाओं में भी पारंगत होने की दरकार होती है। अगर खेल-कूद की बात की जाए तो, जिला प्रशासन द्वारा अभिनव पहल करते हुए जावंगा स्थित एजुकेशन हब के छात्र-छात्राओं को घुड़सवारी में पारंगत करने की कवायद की जा रही है। इसके लिए राजधानी रायपुर से घोड़े एवं प्रशिक्षक की व्यवस्था की गई है, इस क्रम में जावंगा स्थित स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के एकलव्य खेल परिसर में छात्रों हेतु घुड़सवारी प्रशिक्षण गत 1 अप्रैल से प्रारंभ किया गया है। और छात्र-छात्राओं को सुबह और शाम दो पालियों में घुड़सवारी की बारीकियां, अश्व संचालन के तौर तरीके सिखाए जा रहे है और फिलहाल 30-30 छात्र-छात्रा घुड़सवारी प्रशिक्षण ले रहे है। घुड़सवारी प्रशिक्षण के लिए 09 घोड़े उपलब्ध कराये गये है । घुड़सवारी सीख रही लोहंडीगुड़ा की कक्षा-9वीं की छात्रा सुखमती बैज और फरसपाल की मानसी कर्मा, नेमेड़ की बबिता पोयाम, कारली की दीपिका, ग्राम रोकेल की ललिता मुचाकी ने इस संबंध में बताया कि घुड़सवारी सीखना उनके लिए एक रोमांचक अनुभव है और अभी परीक्षा के बाद उनकी छुट्टियां चल रही है और इसका वे सदुपयोग कर रही है। साथ ही उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि घुड़सवारी सीखने का मौका मिलेगा। इसी प्रकार कक्षा 12वीं के छात्र गंगालूर से अंकित हेमला, गंजेनार के सागर भास्कर, बारसूर के भरत मंडावी, महराकरका के सूरज कवासी, दंतेवाड़ा के शंकर मंडावी का कहना था कि शुरुआत में उन्हें घोड़ो से झिझक तो हुई परंतु अब घोड़ो के नाम पुकारने पर घोड़े भी पहचानने लगे है। इस प्रशिक्षण में सभी को कुछ नया सीखने का आनन्द आ रहा है और उन्होंने यहां घोड़ो को साधने की तमाम बारिकियां सीखा और यह पल हमेशा यादगार रहेगा।

इस संबंध में खेल परिसर के अधीक्षक रजनीश ओसवाल बताते है कि यहां घुड़सवारी सीखने वाले छात्र संवेदनशील ग्रामों के रहवासी है और वे पुरे उत्साह के साथ घुड़सवारी सीख रहे है। और यह संभवत पूरे बस्तर संभाग का पहला शैक्षणिक आवासीय परिसर है जहां छात्रों को घुड़सवारी सिखाई जा रही है। साथ ही स्पोर्ट्स सेंटर में घोड़ों को रखने के लिए अस्तबल की भी व्यवस्था है। जिला प्रशासन द्वारा ऐसे क्षेत्र के बच्चों को घुड़सवारी सीखने के मुख्य उद्देश्य छात्रों में आत्मविश्वास एवं क्षमतावर्धन की प्रवृत्ति और प्रतिभा को प्रोत्साहन देना है ।

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