October 22, 2026

बस्तर दशहरा में रथ कारीगर हो रहे उपेक्षित, प्रशासन ने वीआईपी दौरे के चलते वापस भेजा

जगदलपुर/बस्तर न्यूज

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की परंपराओं को लेकर इस बार ग्रामीणों, आदिवासियों और प्रशासन के बीच लगातार तकरार देखने मिल रही है। दो दिन पहले परिक्रमा के दौरान पहिया टूटने पर प्रशासन ने जेसीबी से रथ खिंचवाया था। आदिवासियों ने इसे परंपराओं के विरुद्ध बताकर विरोध किया। इसके बाद उन्हीं पर बल प्रयोग कर दिया गया। बस्तर दशहरा में अहम विधान निभाने वाले जोगी और उसके परिवार को देश के राष्ट्रपति के दौरे से पहले सफाई का हवाला देते हुए जिला प्रशासन ने सिरहासर भवन से बेदखल कर दिया। और आज बड़े झार उमरगांव से रथ निर्माण के लिए आए ग्रामीणों को अपमनित कर उन्हें गांव रवाना कर दिया गया।

दरअसल, शुक्रवार को सिरहासर भवन में मुरिया दरबार लगेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसमें शामिल होंगी। इसी बात का हवाला देते हुए सदियों से रथ निर्माण करने वाले ग्रामीणों को दशहरा संपन्न होने से पहले ही सिरहासर भवन से हटा दिया गया। इस कार्रवाई से रथ निर्माण करने वाले ग्रामीण अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। और उन्हें बिना परंपराएं पूरी किए अपने गांव लौटना पड़ा। इससे वे बस्तर दशहरा के कई बेहद महत्वपूर्ण और पवित्र विधानों में हिस्सा लेने से वंचित हो गए। ग्रामीणों ने कहा कि देवी-देवताओं की विदाई और परंपरागत रस्में पूरी होने से पहले उन्हें इस तरह हटाया जाना उनकी आस्था पर चोट है।

 

रथ कारीगर बलदेव बघेल ने बताया कि इस बार भीतर रैनी के दिन ही हम लोग को भगा रहे हैं। पिछले बार केंद्रीय गृह मंत्री के समय भी ऐसी किए थे। इस बार राष्ट्रपति आ रहे हैं, तो फिर हम लोग को भगा रहे हैं। दो साल से हम लोग मुरिया दरबार में नहीं जा रहे। दो गांव के 145 लोग बस्तर दशहरा में रथ निर्माण करने के लिए आते हैं। विदाई में दस-दस हजार और एक बकरा देकर खानापूर्ति करते है।

एक और ग्रामीण ने स्थानीय बोली में बताया कि अब हम गांव जाकर खेती-बाड़ी करेंगे। मगर यहां दोबारा नहीं आएंगे। अब हमें वह सम्मान नहीं मिल रहा, जो पहले मिलता था। एक अन्य सवाल के जवाब में रथ कारीगर ने कहा कि सांसद तो शक्ल नहीं दिख रहा है। उन्हें तो यहां आकर हमें देखना चाहिए कि क्या हो रहा है हमारे साथ। मगर यहां कोई पूछने वाला नहीं है।

अन्य कारीगर ने कहा कि हर साल हम लोग का विदाई गोल बाजार से होता था। इस बार हम लोग पहले ही अपने गांव जा रहे हैं, सदियों से परंपरा चल रहा है। पहले मुरिया दरबार में राजा आता था, तो सबको बुलाते थे। अब किसी को नहीं बुलाते हैं हम लोगों को कुछ नहीं बताते हैं। खुद ही सब नियम कर लेते हैं। बाहर रैनी/भीतर रैनी रथ को जो कुछ होता था, तो हमारी जिम्मेदारी होती थी। हम लोग रथ को सुधारते थे। अब कोई पूछ नहीं रहा है, तो यहां रह कर क्या करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *