जगदलपुर/बस्तर न्यूज
डाक कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों और विभागीय नीतियों को लेकर भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान करते हुए आज संघ के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता किया। महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि हाल के कुछ नीतिगत निर्णयों और व्यवस्थागत बदलावों से कर्मचारियों के हितों के साथ-साथ डाक सेवाओं की कार्यप्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। कर्मचारियों ने इन मुद्दों पर सरकार और डाक प्रशासन से सकारात्मक पहल की मांग की है।
प्रेस वार्ता में भारतीय ग्रामीण डाक कर्मचारी संघ, छत्तीसगढ़ परिमंडल, बस्तर संभाग के सचिव हेमंत कुमार पाण्डे ने पत्रकारों को बताया कि विभाग में लागू की जा रही सुधारात्मक प्रक्रियाओं और परामर्शदाता संस्थाओं की सिफारिशों को लेकर कर्मचारियों में व्यापक असंतोष है। बचत योजनाओं और अन्य विभागीय कार्यों के लिए निर्धारित लक्ष्यों के कारण कर्मचारियों पर लगातार अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है, जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि मेल मोटर सेवा एवं सिविल विंग में प्रस्तावित संरचनात्मक परिवर्तनों तथा विभिन्न संवर्गों के विलय को लेकर कर्मचारियों के बीच गंभीर चिंताएं हैं। इन विषयों पर कर्मचारियों से व्यापक चर्चा और सहमति के बाद ही निर्णय लिए जाने चाहिए।
महासंघ ने मांगों के समर्थन में चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा भी घोषित की है। इसके तहत 20 से 27 जुलाई तक कर्मचारी काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे। इसके बाद 28 जुलाई को मंडलीय कार्यालयों के समक्ष प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं 5 अगस्त को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का प्रस्ताव रखा गया है। यदि इसके बावजूद मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने पर विचार किया जाएगा।
कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें
1. कार्य से जुड़े लक्ष्यों और टारगेट आधारित व्यवस्था की समीक्षा की जाए। वर्तमान में जीडीएस एवं विभागीय कर्मचारी अपने वेतन के पैसे से खाता खुलवाकर टारगेट पूरा कर रहे हैं।
2. रेल डाक सेवा (आरएमएस) से संबंधित व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार किया जाए।
3. विभाग में रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए।
4. मेल मोटर सेवा और सिविल विंग के पदों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
5. विभिन्न संवर्गों के विलय से पहले कर्मचारियों से व्यापक परामर्श किया जाए।
6. पूर्व सैनिक कर्मचारियों के वेतन संबंधी मामलों का शीघ्र समाधान किया जाए।
7. मृतक आश्रितों को जल्द नियुक्ति प्रदान की जाए।
8. कर्मचारियों के हितों के साथ डाक सेवाओं को मजबूत करने पर जोर
9. आंदोलन का उद्देश्य केवल कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि डाक सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाना भी है।
10. 17 सितम्बर (भगवान विश्वकर्मा जयंती) को राष्ट्रीय श्रम दिवस घोषित किया जाए।
संगठन ने उम्मीद जताई है कि सरकार और डाक प्रशासन कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए सकारात्मक संवाद और समाधान की दिशा में कदम उठाएंगे।
प्रेस वार्ता में संगठन के तोरण हिरवानी, विकास सिंह, रामकृष्ण मिश्रा, नागेन्द्र सिंह, दिकेश कुमार आदि उपस्थित थे।


