जगदलपुर, 14 अप्रैल (बस्तर न्यूज)
बैसाखी पर्व को आज पूरे देश में सिख समाज द्वारा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। वही जगदलपुर शहर स्थित गुरुद्वारा शांति नगर में सिख समुदाय के लोगों ने अपने गुरुओं का स्मरण करते हुए खालसा साजना दिवस और बैसाखी पर्व को भक्ति भरे माहौल में मनाया। 12 अप्रैल से गुरुद्वारा शांति नगर में श्री अखंड पाठ साहिब चल रहा था। जिसका आज समाप्ति हुई। जिसके बाद दोपहर एक बजे तक हेमकुंड साहिब उत्तराखंड से आए रागी जत्था आदित्य प्रताप सिंह और साथियों द्वारा भजन/कीर्तन के माध्यम से गुरुओं की जीवनी पर प्रकाश डाला। जिसे सुन वहां उपस्थित संगत भाव विभोर हो गई। उसके उपरांत अरदास कर सभी भक्तों को गुरु का लंगर बांटा गया। साथ ही आज श्री गुरुद्वारा कमेटी जगदलपुर के पदाधिकारियों ने अपने कार्यकाल में किए गए वार्षिक कार्यों और आय व्यय की जानकारी उपस्थित समाज के समस्त सदस्यों को दी। तथा वर्ष 2026-27 के कमेटी पदाधिकारियों का चुनाव चुनाव अधिकारी तेजपाल सिंह द्वारा सिख समाज की सहमति से किया गया। जिसमें अध्यक्ष स्वर्ण सिंह, उपाध्यक्ष एकम सिंह, सचिव अवतार सिंह, सह सचिव बलविंदर सिंह, इकबाल सिंह, कोषाध्यक्ष गुरुविंदर सिंह का चुनाव सभी सदस्यों द्वारा सर्व सम्मति से किया गया।

खालसा साजना दिवस (खालसा स्थापना दिवस)
13 अप्रैल 1699 को आनंदपुर साहिब में 10वें सिख गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह द्वारा खालसा पंथ की स्थापना की याद में मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र दिन है। यह बैसाखी के साथ मिलकर साहस, समानता, आत्म-बलिदान और जुल्म के खिलाफ लड़ने के संकल्प का प्रतीक है, जहाँ पंज प्यारों को अमृत छकाकर खालसा परंपरा शुरू की गई थी। बैसाखी पर्व 14 अप्रैल को मनाया जाता है। यह मुख्य रूप से फसल कटाई का त्यौहार है और सिख समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन खालसा पंथ की स्थापना हुई थी।

ऐतिहासिक महत्व : 1699 में बैसाखी के दिन, गुरु गोबिंद सिंह ने श्री आनंदपुर साहिब में एक विशाल सभा में स्वयंसेवकों से सिर की मांग की, जिससे ‘पंज प्यारे’ सामने आए।

खालसा पंथ की स्थापना : गुरु जी ने पंज प्यारों को अमृत (अमृत संचार) देकर खालसा पंथ की नींव रखी। उन्होंने पुरुषों को ‘सिंह’ (शेर) और महिलाओं को ‘कौर’ (राजकुमारी) का उपनाम दिया। यह दिन सिखों को एक अनुशासित, समानतावादी और निडर समुदाय (संत-सिपाही) में बदल देता है, जो धर्म की रक्षा और समाज में न्याय के लिए समर्पित है।




