जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध और 75 दिनों तक चलने वाले ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के अंतर्गत सोमवार की शाम महत्वपूर्ण ‘जोगी बिठाई’ की रस्म पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हो गई। पर्व के निर्विघ्न और शांतिपूर्ण आयोजन की कामना को लेकर ग्राम बड़े आमाबाल के युवक दौलत तीसरी बार 9 दिनों की अत्यंत कठिन तप साधना पर बैठ गए हैं।
करीब 600 वर्षों की समृद्ध परंपरा के अनुसार इस रस्म की शुरुआत सोमवार शाम मावली मंदिर में पुजारी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। देवी की पूजा-अर्चना के बाद वहां स्थापित पवित्र तलवार का विधिवत पूजन किया गया। पूजा संपन्न होने के उपरांत जोगी पवित्र तलवार धारण कर मुंडाबाजा और गाजे-बाजे की मंगल धुनों के बीच सिरहसार भवन पहुंचे। वहां प्रार्थना के बाद उन्होंने सिरहसार भवन में बनाए गए लगभग 4 फीट गहरे गड्ढे में पालथी लगाकर आसन ग्रहण किया और आगामी 9 दिनों के लिए कठिन तपस्या व निराहार व्रत का संकल्प लिया। पाठजात्रा, डेरी गड़ाई और काछनगादी जैसी रस्मों के संपन्न होने के बाद आज ‘जोगी बिठाई’ की रस्म पूरी की। जिनकी मौजूदगी में जोगी बस्तर अंचल की सुख-समृद्धि और दशहरे के सकुशल समापन के लिए अखंड साधना में लीन हुए।
