September 20, 2026

चक्रधर समारोह में बस्तर की लोक संस्कृति की गूंज, वित्तमंत्री ने दी प्रोत्साहन राशि

जगदलपुर। संगीत सम्राट महाराजा चक्रधर सिंह की स्मृति में आयोजित होने वाले विश्व विख्यात चक्रधर समारोह के चौथे दिन बस्तर की अनूठी और समृद्ध लोक कला का अद्भुत रंग देखने को मिला। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में रामलीला मैदान में चल रहे इस 10 दिवसीय संगीत एवं कला महापर्व में बस्तर एकेडमी ऑफ डांस आर्ट एंड लिटरेचर यानी ‘बादल’ संस्था आसना के दल ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से पूरे वातावरण को लोक रंग में सराबोर कर दिया।

उपायुक्त आदिवासी विकास एवं नोडल अधिकारी बादल संस्था जीआर सोरी और उक्त संस्था के प्रशासक आशुतोष ठाकुर के मार्गदर्शन में पहुंचे इस दल ने बस्तर के पारंपरिक लेजा गीत, झाली आना, परब गीत और वैवाहिक लोक वाद्यों की मनमोहक धुनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके उपरांत धुरवा जनजाति के पारंपरिक धुरवा मंडई नाचा और माड़िया जनजाति के विख्यात गौर सिंग लोक नृत्य की ऊर्जावान प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया और पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इन प्रस्तुतियों में गायन दल के रूप में भरत गंगादित्य, विशाल सिंह ठाकुर, विनीता पांडे, दिनेश साहू, सिद्धार्थ वैष्णव, कालीदास, रामदास और हेमलता करंगा सहित अन्य कलाकारों ने समां बांधा, वहीं तेजेंद्र कुमार कश्यप ने मंडई नाचा और गणेश मंडावी ने गौर सिंग नृत्य में अपने साथियों संग शानदार समां बांधा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कलाकारों के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन से अत्यंत प्रसन्न होकर मंच से ही बस्तर के कलाकार दल को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने सभी प्रतिनिधि कलाकारों को सम्मानित भी किया।

समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि रायगढ़ का चक्रधर समारोह आज अखिल भारतीय स्तर पर प्रतिष्ठित हो चुका है और ऐसे राष्ट्रीय मंच पर सुदूर बस्तर अंचल के कलाकारों द्वारा अपनी माटी की कला का ऐसा भव्य प्रदर्शन किया जाना गर्व का विषय है। बस्तर से अपने पुराने आत्मीय संबंधों को साझा करते हुए उन्होंने दंतेवाड़ा कलेक्टर के रूप में अपने कार्यकाल को याद किया और कहा कि एक दौर वह भी था जब वहां आए दिन नक्सली वारदातों की खबरें आती थीं, किंतु वर्तमान सरकार के निरंतर प्रयासों से आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं और बस्तर विकास तथा शांति के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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