September 27, 2026

हिंसा प्रभावित युवाओं को रंगमंच से मिली नई राह, नाट्य प्रशिक्षण से हुनर और हौसलों को पंख

नारायणपुर। जिला प्रशासन द्वारा पुनर्वासित एवं मुख्यधारा से जुड़ रहे युवाओं को कला एवं रंगमंच के माध्यम से सशक्त करने की दिशा में एक अभिनव पहल की गई। जिला प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के साथ समन्वय कर नारायणपुर में 30 दिवसीय प्रस्तुतिपरक नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित कराई गई।

जिला प्रशासन की पहल पर टीम द्वारा पुनर्वासित सरेंडर नक्सल युवाओं एवं स्थानीय युवाओं को 30 दिनों तक नाट्य एवं कला का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को अभिनय, रंगमंच, प्रस्तुति एवं कला की विभिन्न विधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस 30 दिवसीय प्रशिक्षण का उद्देश्य पुनर्वासित युवाओं की रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करना, उनमें आत्मविश्वास विकसित करना तथा उन्हें कला एवं संस्कृति के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़ना रहा। मूल कार्यशाला में 100 पुनर्वासित आदिवासी युवा तथा 25 स्थानीय युवा शामिल हुए थे।

प्रशिक्षण से मंच तक का सफर

30 दिवसीय प्रशिक्षण के उपरांत पुनर्वासित युवाओं ने तैयार की गई नाट्य एवं कला प्रस्तुति का मंचन किया। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सरेंडर नक्सल युवाओं ने रायगढ़ में आयोजित चक्रधर समारोह के समापन समारोह में भी अपनी प्रस्तुति दी। यह प्रस्तुति उनके लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक मंच पर अपनी कला और प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर रही। हिंसा से प्रभावित अतीत से निकलकर इन युवाओं का रंगमंच और कला के माध्यम से अपनी पहचान बनाना, उनके पुनर्वास और मुख्यधारा से जुड़ने की प्रक्रिया में एक सकारात्मक कदम के रूप में सामने आया है। जिला प्रशासन द्वारा इस पहल की परिकल्पना युवाओं को उनकी प्रतिभा के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराने तथा बस्तर की कला एवं संस्कृति को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है।

जिला प्रशासन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के इस समन्वित प्रयास ने पुनर्वासित युवाओं के लिए कला को अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के एक प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल प्रस्तुत की है।

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