दन्तेवाड़ा। देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर और एनएसई फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित एवं जिला प्रशासन के सहयोग से सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत दन्तेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर का वर्चुअल तौर पर शुभारंभ करते हुए कहा कि हमारा संकल्प है कि नक्सल हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति तक सहायता पहुँचे, उसका समुचित पुनर्वास हो और वह आत्मविश्वास तथा स्वाभिमान के साथ जीवन में आगे बढ़े। इन समन्वित प्रयासों का उद्देश्य प्रत्येक प्रभावित परिवार को सुरक्षा, सम्मान, आजीविका और आगे बढ़ने का अवसर देना है।

हम ऐसा बस्तर बनाना चाहते हैं, जहाँ बच्चों के सपने भय से मुक्त हों, युवाओं के हाथों में हुनर हो और हर परिवार के जीवन में खुशहाली हो। उन्होंने कहा कि हम प्रभावित लोगों को जीवन में फिर से स्थापित होने का अवसर देना चाहते हैं। यह सरकार का दायित्व है। केवल नक्सलवाद समाप्त कर देना पर्याप्त नहीं है, उससे उत्पन्न पीड़ा और अभाव को दूर करके बस्तर को फिर से हँसता-खेलता बनाना भी हमारी जिम्मेदारी है।
आज सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत इस शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ हो रहा है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में ऐसे सेवामूलक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मुझे प्रसन्नता है कि इस अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा से प्रभावित आदिवासी भाई-बहनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन को सुगम और स्वावलंबी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नक्सल हिंसा में किसी ने हाथ खोया, किसी ने पैर, तो किसी की देखने अथवा सुनने की क्षमता प्रभावित हुई। ऐसे प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचकर उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना हमारी साझा जिम्मेदारी है। इस संवेदनशील पहल के लिए मैं छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और सभी सहयोगी संस्थाओं को हृदय से धन्यवाद देता हूँ। पाँच दशकों तक नक्सलवाद ने यहाँ के गरीब और आदिवासी परिवारों को कितने गहरे घाव दिए हैं, इसका अनुमान इन आँकड़ों से लगाया जा सकता है। राजनीतिक उद्देश्यों के लिए आईईडी विस्फोट कर निर्दोष नागरिकों को दिव्यांग बना देना मानवाधिकारों का गंभीर हनन है। उन्होंने प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के साथ उससे मिले घावों पर मरहम लगाना भी आवश्यक है। प्रभावित लोगों का पुनर्वास करना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और सम्मान के साथ जीवन जीने की व्यवस्था करना हमारा संकल्प है। कृत्रिम हाथ किसी व्यक्ति को फिर से काम करने का सामर्थ्य देता है और कृत्रिम पैर उसे दोबारा अपने पैरों पर खड़े होने का विश्वास देता है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित भाई-बहनों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक, कृत्रिम अंग और कैलीपर जैसे सहायक उपकरण मिलने से उनका दैनिक जीवन सुगम होगा। मुझे विश्वास है कि यह पहल बस्तर में खुशहाली और आत्मविश्वास का नया अध्याय आरंभ करेगी। छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम और नियद नेल्लानार जैसी पहलों के माध्यम से बस्तर में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। मैं स्वयं बस्तर ओलंपिक में गया हूँ। जिन क्षेत्रों में कभी गोलियों और बम धमाकों की आवाजें सुनाई देती थीं, जहाँ भय का वातावरण था, वहाँ आज हजारों युवा खेलों में भाग लेकर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। यह परिवर्तन मन को गहरा संतोष देता है।केन्द्रीय गृह मंत्री ने बस्तर की समृद्ध संस्कृति को रेखांकित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को सशक्त मंच मिला है। नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत दूरस्थ गाँवों तक बुनियादी सुविधाएँ और शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचाया जा रहा है।
इस आयोजन में दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 लोगों को सहायक उपकरणों से लाभान्वित किया जा रहा है। निश्चित रूप से ये उपकरण उनके दैनिक जीवन को सुगम बनाने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने में सहायक होंगे। जिन्होंने अपने पैर खोए हैं, वे कृत्रिम पैरों की सहायता से फिर चल-फिर सकेंगे।
इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शारदीय नवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए माँ दंतेश्वरी से प्रदेशवासियों की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की और कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति देने वाले हमारे वीर जवानों और नक्सली हिंसा में जान गंवाने वाले ग्रामीण भाई-बहनों को मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ।
