जगदलपुर। सहकार से समृद्धि राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन के मंच से बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने बदलतें बस्तर की प्रेरक प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि दशकों तक वामपंथी उग्रवाद और संघर्ष की छाया में पहचान तलाशने वाला बस्तर अब शांति, आधुनिक कनेक्टिविटी और स्थानीय संपदा के दम पर एक सशक्त आर्थिक केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। कलेक्टर ने अपनी प्रस्तुति में अवगत कराया कि बस्तर के विकास की पहली प्राथमिकता सुदूर अंचलों तक कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं की सुदृढ़ पहुंच बनाना है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना चरण-4 के माध्यम से सैकड़ों किलोमीटर सड़कों का निर्माण और स्वीकृति, जगदलपुर-रायपुर फोर-लेन मार्ग और रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना जैसे प्रयास बस्तर को मुख्यधारा से तेजी से जोड़ रहे हैं। इसके साथ ही हैदराबाद व रायपुर तक हवाई सेवाएं और दुर्गम जंगलों में स्थापित किए जा रहे बीएसएनएल के फोर-जी टावर डिजिटल व भौगोलिक दूरियों को तेजी से मिटा रहे हैं। बस्तर के इस ऐतिहासिक बदलाव की सबसे अनूठी मिसाल सुरक्षा और आजीविका का समागम है। पूर्व में सुरक्षा बलों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कैंपों को अब सेवा डेरा यानी आजीविका व कौशल विकास केंद्रों में बदला जा रहा है, जिन्हें एनआईडी अहमदाबाद के सहयोग से पूरे संभाग में आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए थिंक-बी और आईआईएम कलकत्ता के साथ मिलकर स्टार्टअप संस्कृति को पंख दिए जा रहे हैं, जबकि बस्तर क्रिएटर्स हब पोडकास्ट स्टूडियो से युवा डिजिटल कंटेंट क्रिएशन और व्लॉगिंग की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए वनोपज और पारंपरिक शिल्प कलाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। ढोकरा शिल्प, लौह शिल्प और टेराकोटा जैसे जीआई-टैग प्राप्त शिल्प कलाओं को लोका बाजार के जरिए राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि बस्तर कॉफी, महुआ, काजू और इमली के प्रसंस्करण और ब्रांडिंग से महिला स्व-सहायता समूहों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है। इसके अलावा, ढोढरापाल बांस राफ्टिंग, चित्रकोट का ग्लास स्काईवॉक और 150 से अधिक ग्रामीण होम-स्टे इको व ट्राइबल टूरिज्म को एक नई ऊंचाई प्रदान कर रहे हैं।
प्रशासन का संकल्प बस्तर मुन्ने (अग्रणी बस्तर) अभियान के जरिए अंतिम छोर तक जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना है। राशन, पेंशन, मातृत्व लाभ और आयुष्मान भारत कार्ड के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा को 94 प्रतिशत से अधिक परिवारों तक पहुंचाया जा चुका है। अपनी प्रस्तुति का समापन करते हुए कलेक्टर ने सभी हितधारकों और राष्ट्रीय संस्थानों से बस्तर की इस विकास यात्रा में साझीदार बनने का आह्वान किया और कहा कि अब चुनौती केवल शांति बहाल करने की नहीं, बल्कि उस शांति को स्थायी समृद्धि में बदलकर बस्तर को देश का अग्रणी, स्वावलंबी और गौरवशाली जिला बनाने की है।
