जगदलपुर/बस्तर न्यूज
बस्तर की कला, संस्कृति और स्थानीय कारोबार को मंच देने वाले तीन दिवसीय द बस्तर एडिट में हिमांशी साहू के कला उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने हैं। रिया बताती हैं कि यात्राओं के दौरान उन्होंने महसूस किया कि हर क्षेत्र की पहचान वहां के कपड़ों, कला, खानपान और वस्तुओं में नजर आती है, लेकिन छत्तीसगढ़ की ऐसी आधुनिक पहचान उन्हें कम दिखाई दी। इसी विचार से उन्होंने जीआरएच-36 की शुरुआत की। हिमांशी साहू के इस सोच को हर्षराज साहू, निश्चय साहू और सिद्धि रजक का साथ मिला। इनका प्रयास आज धीरे-धीरे एक मुकाम की ओर बढ़ रहा है।
इन सभी का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति को रोजमर्रा के पहनावे के जरिए युवा पीढ़ी और देश-दुनिया तक पहुंचाया जाए। नगर के आर्ट गैलरी में आयोजित द बस्तर एडिट में हिमांशी साहू के उत्पादन को शानदार प्रतिसाद मिल रहा है।
