दंतेवाड़ा/ बस्तर न्यूज
जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित आज पत्रवार्ता में भाजपा सरकार पर आदिवासी समाज की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। छबिंद्र कर्मा ने कहा कि 9 अगस्त को पूरी दुनिया में आदिवासी समाज ने विश्व आदिवासी दिवस मनाया, लेकिन भाजपा के किसी नेता, आदिवासी जनप्रतिनिधि, यहां तक कि राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की ओर से भी आदिवासी समाज को बधाई संदेश नहीं दिया गया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से पहले भाजपा के नेता विश्व आदिवासी दिवस पर बधाई देते रहे हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार आदिवासी संस्कृति, परंपरा और अस्मिता के प्रति उदासीन रवैया अपना रही है। कांग्रेस ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों को याद करने का दिन है। आदिवासी समाज ने सदियों से प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छत्तीसगढ़ की पहचान भी आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत के बिना अधूरी है। कांग्रेस ने आदिवासी वीरों को नमन करते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर सहित असंख्य आदिवासी वीरों ने अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष किया। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
कांग्रेसी नेता छबिंद्र कर्मा ने कहा कि दंतेवाड़ा जिले में तीन स्थानों पर विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन किया गया। उन्होंने भाजपा सरकार पर आदिवासी समाज को बांटने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी समाज को अपने अधिकारों के लिए एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज की पहचान और जीवन का आधार हैं। इन्हें बचाने के लिए सभी आदिवासियों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।
प्रेस वार्ता को जिला कांग्रेस अध्यक्ष शकील अहमद रिज़वी ने भी संबोधित करते हुए कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज के अधिकारों और उनकी ऐतिहासिक भूमिका को याद करने का दिन है। छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज की बड़ी आबादी है और प्रदेश की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आदिवासी हितों की बात तो करती है, लेकिन धरातल पर आदिवासी समाज के अधिकारों और उनकी आवाज को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
जिला पंचायत सदस्य तुलिका कर्मा ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार में आधे से अधिक मंत्री आदिवासी समाज से आते हैं, लेकिन सत्ता में पहुंचने के बाद वे यह भूल गए हैं कि वे भी आदिवासी समाज का हिस्सा हैं।
इस दौरान वरिष्ठ नेता वीरेंद्र गुप्ता, जिला पंचायत सदस्य सुलोचना कर्मा, मनीष भट्टाचार्य, विवेक देवांगन, मनोज कौरव समेत अन्य उपस्थित थे।




