जगदलपुर/बस्तर न्यूज
पूर्व विधायक रेखचंद जैन ने राज्य सरकार पर स्थानीय छात्रों के हितों पर कुठाराघात करने का आरोप लगाया है। दरअसल यह आरोप राज्य सरकार के उस फैसले के विरोध में आया है जिसमें छत्तीसगढ़ सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर मेडिकल छात्रों के लिए स्नातकोत्तर प्रवेश नियम 2025 में संशोधन कर राज्य कोटे की सीटें 50 प्रतिशत से घटाकर 25 फीसद कर दी है। नये नियम लागू होते ही मेडिकल छात्रों में असंतोष बढ़ गया है। राज्य सरकार के इस फैसले का असर सरकारी व निजी मेडिकल कालेजों की राज्य कोटे की कुल सीटों पर पड़ेगा। इस निर्णय का विपरीत असर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे स्थानीय छात्रों पर पड़ेगा। वे न केवल पीजी की पढ़ाई से वंचित किए जाएंगे, अपितु एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद ग्रामीण सेवा से वंचित किए जाएंगे। जिसका असर राज्य के बस्तर जैसे पिछड़े क्षेत्रों पर पड़ेगा।
अभी जगदलपुर मेडिकल कालेज में पीजी की 28 सीटें हैं जिसमें राज्य कोटे की सीट 15 है। राज्य सरकार के फैसले से यह आधी हो जाएंगी जिसका विपरीत असर पड़ना तय है। रेखचंद जैन ने कहा है कि राज्य की भाजपा सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार कर स्थानीय छात्रों के हित में निर्णय लेना चाहिए।
उल्लेखनीय है की प्रदेश में पीजी सीटों की संख्या 566 है। इनमें से राज्य कोटा फिलहाल 190 है। जवाहर लाल नेहरू कालेज रायपुर में सर्वाधिक 146 पीजी सीटें हैं। इसमें से फिलहाल 74 सीटें राज्य कोटा की हैं, वहीं आल इंडिया कोटे के तहत 72 सीटें हैं। राज्य सरकार के नोटिफिकेशन से तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी और मात्र 37 सीटें वहां राज्य कोटे की रह जाएंगी। रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर, रायगढ़, राजनांदगांव व कोरबा में सरकारी मेडिकल कालेज हैं। इन कालेजों की 190 पीजी सीटों में से आधी ही राज्य कोटे की रह जाएंगी। सरकार के नये फैसले में निजी कालेजों में 42.5 फीसद स्टेट कोटा तथा इतना ही मैनेजमेंट कोटा रखा गया है।




