जगदलपुर। बस्तर की ऐतिहासिक धरा रविवार को एक नया कीर्तिमान रचने जा रही है, जहाँ 8000 से अधिक धावकों का विशाल जनसमूह ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ में अपनी रफ्तार का प्रदर्शन करेगा। यह महाकुंभ न केवल एक खेल प्रतियोगिता है, बल्कि यह क्षेत्र के बदलते स्वरूप, शांति और विश्वास की एक जीवंत झांकी भी है। इस भव्य आयोजन की सबसे प्रेरक तस्वीर उन 200 से अधिक पुनर्वासित माओवादी कैडरों के रूप में उभर रही है, जो कभी संघर्ष की राह पर थे, लेकिन अब मुख्यधारा का हिस्सा बनकर समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर दौड़ने को बेताब हैं। बस्तर संभाग के सातों जिलों से आए युवा शासन की ‘पूना मारगेम’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) जैसी कल्याणकारी नीति की सफलता का जीवंत उदाहरण पेश कर रहे हैं।
इस मैराथन की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता का प्रमाण इस बात से मिलता है कि कुल 8000 से अधिक पंजीकरणों में विदेशी धावक भी शामिल हैं, जिनमें लंबी दूरी की दौड़ के लिए विश्व विख्यात इथोपिया और केन्या के मंझे हुए एथलीट बस्तर की सड़कों पर अपनी धाक जमाएंगे। इस महाकुंभ का मुख्य आकर्षण 42 किलोमीटर की ‘फुल मैराथन’ होगी, जो जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान से शुरू होकर ‘भारत के नियाग्रा’ कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के तट पर संपन्न होगी। धावक जब बस्तर के पारंपरिक गांवों और नैसर्गिक सौंदर्य के बीच से गुजरेंगे, तो उन्हें यहाँ की समृद्ध विरासत और अदम्य साहस का अनूठा अनुभव होगा।
इस आयोजन को समावेशी बनाने के लिए इसे फुल मैराथन, हाफ मैराथन (21 किमी), 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर की श्रेणियों में विभाजित किया गया है, ताकि पेशेवर एथलीट्स के साथ-साथ स्थानीय युवा और फिटनेस प्रेमी भी इसका हिस्सा बन सकें। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 25 लाख रुपये की विशाल इनामी राशि की घोषणा की गई है। प्रतियोगिता की गरिमा को बढ़ाते हुए इसमें ‘ओपन कैटेगरी’ के साथ-साथ विशेष रूप से ‘बस्तर कैटेगरी’ को भी शामिल किया गया है, ताकि स्थानीय धावकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने और अपनी प्रतिभा निखारने का सुनहरा अवसर मिल सके।



