दंतेवाड़ा

जैविक खेती करने वाले किसान को ‘भुइयां के भगवान’ सम्मान मिला

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ की माटी और किसानों के प्रति समर्पण को सम्मानित करने वाले एक स्थानीय न्यूज चैनल के प्रतिष्ठित भुइयां के भगवान पुरस्कार से इस वर्ष दंतेवाड़ा जिले के ग्राम कासौली के प्रगतिशील किसान सुरेश कुमार नाग को सम्मानित किया गया। उपमुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान निधि प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि दंतेवाड़ा जिले के कृषि जगत के लिए गौरव का क्षण है।

सुरेश कुमार नाग की यह उपलब्धि केवल ग्राम कासौली तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले के उन किसानों के लिए प्रेरणा है जो रसायनों को छोड़कर प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर लौट रहे हैं। जैविक खेती के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए नवाचार, निरंतर प्रयास और सफल प्रयोगों को देखते हुए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया है। उन्होंने वर्षों पूर्व रासायनिक खेती के दुष्परिणामों को समझते हुए जैविक खेती को अपनाया और ग्राम कासौली जैसे दूरस्थ क्षेत्र में रहते हुए यह सिद्ध किया कि मजबूत इच्छाशक्ति और परंपरागत संसाधनों से भी बेहतर उत्पादन संभव है। अपने खेतों में रासायनिक उर्वरकों का पूरी तरह त्याग कर जीवामृत, घन-जीवामृत तथा स्थानीय औषधियों से निर्मित कीटनाशकों जैसे ब्रह्मास्त्र और नीमास्त्र का उपयोग शुरू किया। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने पर उन्होंने अपने अनुभव आसपास के किसानों के साथ साझा किए और पूरे जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने का कार्य किया। उनके प्रयासों से कई गांवों के किसान प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित हुए हैं। इसके साथ ही वे 100 से अधिक परंपरागत धान की किस्मों के संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जिले में श्री विधि से रागी तथा श्री विधि से कोसरा जैसे नवाचारों के प्रयोग में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है।

जिला प्रशासन और कृषि विभाग के मार्गदर्शन में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों को सुरेश कुमार नाग जैसे किसानों ने धरातल पर उतारा है।

सम्मान समारोह के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सुरेश कुमार नाग जैसे किसान समाज के असली नायक हैं, जो न केवल अन्न का उत्पादन कर रहे हैं बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित मिट्टी और शुद्ध पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। सम्मान प्राप्ति के बाद सुरेश कुमार नाग ने कहा कि यह पुरस्कार उनका नहीं बल्कि उन सभी किसानों का है जो धरती माता को रसायनों के जहर से बचाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

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