जगदलपुर। बस्तर की माटी की सोंधी महक और यहाँ की प्राचीन लोक कलाओं को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने के संकल्प के साथ दलपत सागर के समीप ‘बस्तर आर्ट गैलरी’ में एक विशेष भित्ति चित्र प्रदर्शनी का भव्य आयोजन शुक्रवार को किया गया। जिला प्रशासन बस्तर के सौजन्य से आयोजित इस प्रदर्शनी में बस्तर की ‘जगार शैली’ और सरगुजा की ‘रजवार शैली’ के चित्रों ने आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव ने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कलाकारों की कल्पनाशीलता की मुक्त कंठ से सराहना की। प्रत्येक कृति की बारीकियों को गहराई से समझा और इन्हें बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का गौरव बताया। विजिटर बुक में अपने भाव व्यक्त करते हुए उन्होंने इस कला को ‘अद्भुत’ की संज्ञा दी और कहा कि पारंपरिक शैलियों को आधुनिक मंच प्रदान करना एक सराहनीय पहल है।
प्रदर्शनी के दौरान आम जनता और कला प्रेमियों का उत्साह भी देखते ही बन रहा था। बड़ी संख्या में पहुँचे प्रबुद्धजनों और नागरिकों ने इन चित्रों को बस्तर और सरगुजा अंचल की लोकगाथाओं का जीवंत दस्तावेज बताया। दर्शकों का कहना था कि राजेन्द्र राव राऊत और डॉ. शशिप्रिया उपाध्याय के मार्गदर्शन में तैयार हुए ये चित्र न केवल दीवारें सजा रहे हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ की विलुप्त होती परंपराओं को भी पुनर्जीवित कर रहे हैं।
बस्तर एकेडमी ऑफ डांस, आर्ट एंड लिटरेचर और संस्कार भारती के विशेषज्ञों द्वारा 25 फरवरी से आयोजित हुई कार्यशाला के 50 प्रशिक्षार्थियों की मेहनत को जब जनप्रतिनिधियों और आम जनता की इतनी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली, तो कलाकारों के चेहरे खिल उठे। यह प्रदर्शनी सही मायनों में बस्तर की माटी और कलाकारों के हुनर का एक सामूहिक उत्सव साबित हुई, जिसने पूरे प्रदेश को अपनी कलात्मक आभा से सराबोर कर दिया।



