जगदलपुर/बस्तर न्यूज
बस्तर जिला अधिवक्ता संघ द्वारा आज जिला न्यायालय परिसर में स्थित ग्रन्थालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में उच्च न्यायालय की खंडपीठ बस्तर में स्थापित किए जाने की मांग को लेकर आंदोलन की रूप रेखा पर चर्चा की गई।
बस्तर जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विक्रमादित्य झा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन पूर्ण रूप से शांतिपूर्ण व गैर राजनीतिक होगा। इस आंदोलन में पूरे बस्तर संभाग के लोग शामिल हो, इसे ध्यान में रखकर मांग पूरा होने तक आंदोलन संचालित हो उसके नेतृत्व का निर्णय लिया जायेगा। उच्च न्यायालय खंडपीठ की मांग को लेकर कार्य योजना पर शीघ्र ही एक विशेष बैठक बुलाई जाएगी। जिसमें बस्तर संभाग के सभी जिला अधिवक्ता संघ, व्यापारिक संगठन, परिवहन संगठन सहित समाज के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा और सर्वसम्मति से आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। अध्यक्ष ने बताया कि नया मध्यप्रदेश के गठन के पूर्व 01 नवम्बर 1956 तक पुराना मध्यप्रदेश जिसमें विदर्भ, छत्तीसगढ़ और महाकौशल शामिल थे और पुराना मध्यप्रदेश की राजधानी नागपुर थी। नागपुर में 01 नवम्बर 1956 तक जो उच्च न्यायालय था वहीं मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय बना जिसकी स्थापना 02 जनवरी 1936 की गई थी। तत्कालीन मध्यप्रदेश में जो उच्च न्यायालय था उसका कार्यक्षेत्र बहुत बड़ा था और आवश्यकता महसूस की गई कि मध्यप्रदेश की 39 ऐसी रियासतें जिसमें उड़ीसा और छत्तीसगढ़ की रियासतें थीं। उसके रहने वाले लोगों और उस भू-भाग के लिये एक पृथक उच्च न्यायालय की स्थापना की गई जिसका नाम रखा गया हाई कोर्ट फॉर एड्रन प्रिंसली स्टेट्स और इसकी मुख्य पीठ रायगढ़ और खण्डपीठ जगदलपुर में थी। इसका उद्घाटन 25 जनवरी 1943 को किया गया और यह हाई कोर्ट 1948 तक सफलतापूर्वक कार्य करता रहा। वर्ष 1948 में जब रियासतें का विलीनीकरण हुआ, तो इस हाईकोर्ट का विलीनीकरण नागपुर उच्च न्यायालय में कर दिया गया था। बस्तर में आजादी से पहले छोटे प्रकरणों की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट के द्वारा की जाती थी और सत्र प्रकरण (बड़े आपराधिक मामलों) की सुनवाई स्वतः प्रशासक डब्ल्यू वी. गिक्सन ने बहुत विस्तार से इस सुनवाई का उल्लेख मरिया मर्डर एंड सूइसाइड
की प्रस्तावना में किया है।
जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष ने कहा कि समय-समय पर अन्य राज्यों के खण्डपीठों की स्थापना होती रही है। जिस दिन मध्यप्रदेश का गठन हुआ, उसी दिन जबलपुर में 01 नवम्बर 1956 को जबलपुर उच्च न्यायालय की तथा ग्वालियर और इंदौर खण्डपीठ का गठन किया गया। इसी तरह अन्य राज्यों में भी खण्डपीठ का गठन हुआ। उन्होंने कहा कि मेरे पिछले अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल के दौरान पंद्रह वर्ष पूर्व मैंने 13.03.2011 को एक विस्तृत आवेदन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधिपति और छत्तीसगढ़ के राज्यपाल को प्रेषित किया था। जिन्होने आवेदन पर संज्ञान भी लिया था और उच्च न्यायालय की फुल कोर्ट की मीटिंग में उस समय आवेदन पर विचार कर आवेदन निरस्त कर दिया। कालान्तर में समय-समय पर इस संबंध में पत्र लिखे गये जिन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। अब समय आ गया है कि हम समाज के सभी लोग इस पर मिलकर शांतिपूर्वक आंदोलन करें। जिसकी रूपरेखा समाज के सभी वर्गों के साथ बैठकर बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि पत्रकार साथियों की भी इस आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। बस्तर के लोगों को सुलभ और सस्ता न्याय मिल सके, इसके लिए प्रयास करना चाहिए।
पत्रवार्ता में दौरान बस्तर जिला अधिवक्ता संघ के सचिव संतोष चौधरी, उपाध्यक्ष अवधेश कुमार झा और प्रीति वानखेडे, सहसचिव भारत सिंह सेठिया, कोषाध्यक्ष दिनबंधु रथ, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा सचिव गिरिधर, ग्रंथपाल ओम प्रकाश यादव, कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती संतोष जैन, परमजीत मोहना, रामऊराम मौर्य, संगीता श्रीवास्तव एवं अन्य उपस्थित थे।




