जगदलपुर/बस्तर न्यूज
जनजातीय परंपराओं, कला और संस्कृति को समाहित बस्तर पंडुम के समापन समारोह में शामिल होने पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को बस्तर पंडुम में आदिम जनजातीय परंपराओं पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने ने स्टॉलों का भ्रमण कर स्थानीय जनजातियों के जीवन में उपयोग की जाने उत्पादों और कारीगरों व कलाकारों द्वारा प्रदर्शित कलाओं एवं उत्पादों की विस्तृत जानकारी ली। केंद्रीय गृह मंत्री ने बस्तर पंडुम के स्टॉल में ढोकरा हस्तशिल्प कला, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस कला, लौह शिल्प, जनजातीय वेश-भूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, बस्तर की जनजातीय चित्रकला, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसकी सराहना की।

जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण स्टॉल में बस्तर क्षेत्र की प्रमुख जनजातियां दंडामी माडिया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण संबंधित जनजातियों के युवक-युवतियों द्वारा प्रदर्शित किए गए। बस्तर की चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। इसके अलावा जनजातीय औषधि में उपयोग होने वाले जड़ी बूटी का रोगों के उपचार के लिए किया जाता है इसका भी जीवंत प्रदर्शन तिरिया क्षेत्र के वैद्यराज ने किया। स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जनजातीय दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री एवं पेय पदार्थों का प्रदर्शन किया गया। इसमें जोंधरी लाई के लड्डू, जोंधरा, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, भेंडा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ पेय पदार्थ लांदा और सल्फी को प्रदर्शित किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री ने स्टाल निरीक्षण के दौरान बड़ा और मुर्रा लाडू का स्वाद भी लिया। लोक जीवन से संबंधित लोकचित्रों की प्रदर्शनी में बस्तर की संस्कृति और इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य, लोकजीवन एवं लोक परंपराओं से जुड़ी तस्वीरों के साथ-साथ बस्तर के जनजातीय समाज और लोक संस्कृति से संबंधित साहित्य भी प्रदर्शित किया गया।
केंद्रीय गृहमंत्री को प्रदर्शित स्टालों से कलाकारों द्वारा प्रतीक चिह्न भेंट किया गया । इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर पण्डुम के बारह विधाओं की प्रतियोगिता में विजेता दलों से मुलाकात कर उनको बधाई भी दी।
बस्तर पंडुम 2026 संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता
1. जनजातीय नृत्य-गौर माडिया नृत्य(बुधराम सोढ़ी दन्तेवाड़ा)
2. जनजातीय गीत-पालनार दल(मंगली एवं साथी दन्तेवाड़ा)
3. जनजातीय नाट्य- लेखम लखा (सुकमा)
4. जनजातीय वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन-रजऊ मंडदी एवं साथी (कोण्डागांव)
5. जनजातीय वेशभूषा का प्रदर्शन-गुंजन नाग (सुकमा)
6. जनजातीय आभूषण का प्रदर्शन-सुदनी दुग्गा (नारायणपुर)
7. जनजातीय शिल्प का प्रदर्शन-ओमप्रकाश गावड़े (कोया आट्स) कांकेर
8. जनजातीय चित्रकला का प्रदर्शन-श्री दीपक जुर्री (कांकेर)
9. जनजातीय पेयपदार्थ का प्रदर्शन-भैरम बाबा समूह (उर्मीला प्रधान) बीजापुर
10. जनजातीय व्यंजन का प्रदर्शन-श्रीमती ताराबती (दन्तेवाड़ा)
11. आंचलिक साहित्य का प्रदर्शन-श्री उत्तम नाईक (कोण्डागांव)
12. बस्तर वन औषधी का प्रदर्शन-राजदेव बघेल (बस्तर)




