दंतेवाड़ा। जिले में जनजातीय उप-योजना के अंतर्गत आज कृषक प्रशिक्षण सह किसान संगोष्ठी का आयोजन बड़े ही उत्साहपूर्ण माहौल में किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो कुशमौर, मऊ (उ.प्र.) तथा कृषि विज्ञान केंद्र दंतेवाड़ा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला में जिले भर से आए किसान बड़ी संख्या में शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक चैतराम अटामी ने कृषकों को प्रेरणादायी संदेश में कहा कि हमारे पूर्वजों की खेती प्राकृतिक अनुकूल परिस्थितियों पर आधारित थी, जहाँ तीन महीनों में फसल तैयार हो जाती थी। लेकिन समय के साथ जलवायु परिवर्तन ने खेती पर सीधा प्रभाव डाला है। ऐसे में किसानों के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि दन्तेवाड़ा जिला की एक बड़ी उपलब्धि यह है कि यह जैविक कृषि के मामले में अन्य क्षेत्रों आगे है। जहां अन्य क्षेत्र जैविक कृषि में जगह बनाने के लिए अपने प्रारंभिक प्रयास कर रहे है वहीं दन्तेवाड़ा जिला जैविक कृषि के चलते देष में अपना एक मुकाम बना चुका है।

संगोष्ठी के समापन पर अतिथियों के द्वारा चयनित हितग्राही को वर्मी बेड, सिंचाई लपेटा पाइप, कृषि कार्य में उत्कृष्ट प्रयास करने वाले प्रगतिशील कृषकों को प्रशस्ति पत्र दिए गए। कार्यशाला में आईसीएआर, एनबीएआईएम मऊ (उ.प्र.) से आए वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रमोद कुमार साहू तथा प्रशासनिक अधिकारी रजनीश मीणा, वरिष्ठ वैज्ञानिक ओम प्रकाश, उप संचालक कृषि सूरज पंसारी, सहायक संचालक धीरज बघेल, सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं हितग्राही कृषक उपस्थित थे।



