जगदलपुर/बस्तर न्यूज
होली के मंगल अवसर पर शहर को हंसाने और गुदगुदाने के उद्देश्य से साहित्य एवं कला समाज जगदलपुर के द्वारा अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन टाउन क्लब मैदान, दंतेश्वरी मंदिर के सामने किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संजय पाण्डे महापौर एवं अन्य अतिथियों में खेमसिंह देवांगन सभापति नगर निगम, पूर्व पार्षद श्रीमती दीप्ति पाण्डे, पार्षद निर्मल पानीग्राही, लक्ष्मण झा आदि उपस्थित रहकर देर रात तक कवियों की कविताओं का आनंद लिया।
हास्य कवि की इस फौज में म.प्र. के छपारा से मुकेश मनमौजी, वारासिवनी से अंतु झकास, गीदम से विशाल आवारा का साथ दे रहे थे और हमारे शहर से लोक कवि रंगमंच कलाकार नरेन्द्र पाढ़ी, श्रीमती डालेश्वरी पाण्डे, श्रीमती स्मृति मिश्रा, श्रीमती ममता मधु शामिल थे।
सनत सागर ने कुशलता से मंच का संचालन करते हुये श्रोताओं को बांध रखा था। उन्होंने हंसी ठिठोली करते हुये कहा कि पार्षद यदि अपनी प्रेमिका से प्रेम का इजहार करेंगे, तो ये पंक्तियां होंगी। दलपत सागर में उगी जलकुंभियों की तरह तेरे घने बाल हैं, उखड़ी गढ्ढेवाली सड़कों में तकधिन तकधिन करती चाल है, शहर के मच्छरों की गुनगुनाहट तरह तेरे होंठों की सुरताल है, कब तू सज संवर कर बनठनकर आयेगी यही होंठों पर सवाल ह्रै।
मुकेश मनमौजी ने अपनी कविता में कहा हमारी कविताओं में सरस्वती का वास होता है, जो ताली बजाते हैं, वो पार्षद होते हैं, वे महापौर बन जाते हैं और जो महापौर होते हैं वे विधायक बन जाते हैं।
टीवी सीरियल वाह वाह क्या बात के कवि अंतु झकास ने अपनी अदाओं से खूब हंसाया। ममता मधु ने अपनी चिंगारी कविता से महिलाओं का पक्ष रखते हुए श्रृंगार की कविताएं पढ़ीं। प्रथम बार मंच साझा करने वाली श्रीमती डालेश्वरी पाण्डे ने अपनी आवाज और रचनाओं से शमा बांध दिया, तो वहीं स्मृति मिश्रा ने अपनी गजल और मुक्तकों से खूब तालियां बटोरी।
नरेन्द्र पाढ़ी ने अपनी हल्बी रचनाओं से श्रोताओं को हंसने पर मजबूर कर दिया। कुंभ में प्रसिद्ध हुई मोनालिया और नवजवानों के लेकर कविता पढ़ी। विशाल आवारा ने अपनी गंभीर आवाज में गजल पढ़ी।
देर रात तक चले कवि सम्मेलन ने शहर के गणमान्य और प्रतिष्ठितजनों की उपस्थिति ने यादगार बना दिया।


