जगदलपुर। दृढ़ संकल्प, अनुशासन और सच्ची लगन हो तो सीमित संसाधन भी सपनों की राह में बाधा नहीं बन सकते। इसे सच कर दिखाया है बस्तर जिले के दरभा विकासखंड स्थित ग्राम छिंदावाड़ा-कावारास की होनहार बेटी मनीषा कश्यप ने। एक साधारण कृषक परिवार से ताल्लुक रखने वाली मनीषा ने अपनी अथक मेहनत के बल पर नीट-2026 में शानदार सफलता अर्जित कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट पक्की कर ली है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही मनीषा अपने गांव से डॉक्टर बनने की दिशा में कदम बढ़ाने वाली पहली छात्रा बन गई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में हर्ष और गर्व की लहर दौड़ गई है।
किसान पिता चंदन सिंह कश्यप और माता गौरी कश्यप के मार्गदर्शन में पली-बढ़ी मनीषा ने अपनी इस मंजिल को पाने के लिए जगदलपुर स्थित ज्ञानगुड़ी कोचिंग सेंटर से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की गंभीर तैयारी शुरू की थी। कोचिंग के साथ-साथ उन्होंने लाला जगदलपुरी लाइब्रेरी में घंटों नियमित अध्ययन कर अपनी दिनचर्या को पूरी तरह पढ़ाई के प्रति समर्पित रखा। बिना किसी विचलन के की गई निरंतर तपस्या और समय के सटीक प्रबंधन का ही सुखद परिणाम रहा कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की इस कठिन परीक्षा में परचम लहराकर सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त किया।
गांव की पहली भावी महिला चिकित्सक के रूप में मनीषा की यह सफलता दूरस्थ ग्रामीण अंचल के उन तमाम छात्र-छात्राओं के लिए एक सशक्त प्रेरणा बनकर उभरी है, जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े प्रतियोगी इम्तिहानों की तैयारी कर रहे हैं। बेटी के चयन की सूचना मिलते ही परिवार सहित पूरे छिंदावाड़ा-कावारास गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया, जहां परिजनों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने एक-दूसरे को बधाई देकर मनीषा के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अब मनीषा का ध्येय एमबीबीएस की पढ़ाई निष्ठापूर्वक पूरी कर डॉक्टर बनना और बस्तर के सुदूर क्षेत्रों में पहुंचकर जनसेवा को समर्पित होना है। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो गांव की पगडंडियों से निकलकर भी बड़े से बड़े मुकाम को हासिल किया जा सकता है।
