बस्तर/बस्तर न्यूज
बस्तर की शिक्षा व्यवस्था को लेकर इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के बस्तर जिला उपाध्यक्ष भुवनेश्वर कश्यप ने छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री को सार्वजनिक रूप से खुली बहस की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि बस्तर की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे दावों और जमीनी हकीकत पर जनता के सामने तथ्यात्मक एवं सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए।
भुवनेश्वर कश्यप ने कहा कि वे सभी मीडिया प्रतिनिधियों के सामने शिक्षा मंत्री के साथ आमने-सामने खुली बहस करने के लिए तैयार हैं। इस बहस में बस्तर के शासकीय स्कूलों की स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यार्थियों को मिलने वाली शैक्षणिक सुविधाएं, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति, स्कूलों में मूलभूत संसाधन तथा शिक्षा की गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाए। यदि सरकार बस्तर की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपने दावों पर कायम है, तो शिक्षा मंत्री को जनता और मीडिया के सामने आकर उन दावों को तथ्यों के साथ स्पष्ट करना चाहिए। कश्यप ने कहा कि इस विषय पर केवल बयानबाजी के बजाय जमीनी स्थिति पर सार्वजनिक संवाद होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ये बस्तर की बात है, इसलिए बहस भी बस्तर में होनी चाहिए। शिक्षा मंत्री को बस्तर आकर यहां की जनता के सामने शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए।
भुवनेश्वर कश्यप ने कहा कि मैं बस्तर की शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर सभी मीडिया प्रतिनिधियों के सामने खुली बहस के लिए तैयार हूं। यदि शिक्षा मंत्री मेरी चुनौती स्वीकार नहीं करते और बस्तर की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े जनता के सवालों का सामना करने से पीछे हटते हैं, तो उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि बस्तर के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने से जुड़ा सार्वजनिक मुद्दा है। उन्होंने कहा कि बस्तर के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को भी शहरों के विद्यार्थियों के समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्याप्त शिक्षक औ आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है। कश्यप ने शिक्षा मंत्री से खुली बहस की तारीख और समय सार्वजनिक रूप से तय करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि बहस बस्तर की शिक्षा व्यवस्था को लेकर है, तो इसका आयोजन बस्तर की धरती पर ही होना चाहिए, ताकि यहां की वास्तविक परिस्थितियों को सामने रखकर जनता और मीडिया की मौजूदगी में चर्चा की जा सके।
